एक्सपायरी डे पर ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करें?

एक्सपायरी डे पर ऑप्शन ट्रेडिंग करने से क्या आप भी घबराते हैं?

इस ब्लॉग के माध्यम से आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करेंगे जो स्टॉक मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग करने वाले ट्रेडर्स के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, हम जानेगे कि एक्सपायरी डे पर ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करें”!

एक्सपायरी डे पर ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करें?
option expiry trading

ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है: (What is Option Trading)

पहले तो, ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading) क्या है? इस कांसेप्ट को समझना अत्यंत जरुरी है। ऑप्शन ट्रेडिंग, स्टॉक मार्केट में ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट या अधिकार की खरीददारी और बिक्री करके किए जाने वाली ट्रेडिंग गतिविधि को कहते हैं।

इसमें एक व्यक्ति एक निश्चित मूल्य (ऑप्शन प्राइस) पर एक निश्चित एक्सपायरी डेट तक एक स्टॉक को खरीदने या बेचने का अधिकार खरीदता है।

एक्सपायरी डे क्या है: (What is Expiry Day)

अब एक्सपायरी डे का मतलब है कि वह दिन जब एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट या अधिकार का मूल्य समाप्त होता है। यानी कि वह दिन जिस दिन ऑप्शन का समय समाप्त हो जाता है।

एक्सपायरी डेट के बाद ऑप्शन की कोई वैल्यू नहीं बचती है जिस प्रकार से किसी भी मेडिसन की एक्सपायरी के बाद कोई वैल्यू नहीं बचती है। यह दिन बाजार में गहरी उतार-चढ़ाव और वोलेटिलिटी के साथ आता है और उस दिन ऑप्शन ट्रेडिंग में बहुत सारी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजियों का प्रयोग करते हैं।

एक्सपायरी डे पर ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीति: (Option Trading Strategies on Expiry Day)

एक्सपायरी डे के दिन ऑप्शन ट्रेडिंग की कुछ महत्वपूर्ण स्ट्रेटेजीज निम्नलिखित हैं:

पहले से योजना बनाना:

एक्सपायरी डे पर, ट्रेडर भावनाओं का शिकार हो सकता है, जिससे जल्दबाजी में गलत फैसले लेने का खतरा होता है। इस खतरे से बचने के लिए, अपनी ट्रेडिंग की योजना पहले से ही तैयार करें। पूरी तरह से शोध करें, अपने पोसिशन्स का विश्लेषण करें, और स्पष्ट टारगेट और स्टॉप-लॉस निर्धारित करें।

लिक्विड ऑप्शन में ही ट्रेड करें:

लिक्विडिटी एक महत्वपूर्ण तत्व है, खासकर एक्सपायरी डे पर। ऑप्शन ट्रेडिंग में हाई ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले ऑप्शन चुनें। लिक्विड ऑप्शन के बीच बिड (Bid) – आस्क (ASk) स्प्रेड ज्यादा होती है, जिससे आपके ट्रेड पर असर कम होता है। इससे आप आसानी से अपने ट्रेड में एंट्री और एग्जिट कर सकते हैं।

एक्सपायरी डे पर नई रणनीतियों से बचें:

एक्सपायरी डे पर नई ट्रेडिंग स्ट्रेटजीस का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पहले से बैक टेस्ट करी ट्रेडिंग रणनीतियों का चयन करें। अपरिचित रणनीतियों का इस्तेमाल भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

इन-द-मनी ऑप्शन से सावधान रहें:

एक्सपायरी डे पर इन-द-मनी (ITM) ऑप्शन खरीदने से बचना चाहिए। क्योंकि उनमें अधिकांश की इन्ट्रिंसिक वैल्यू होती है। यदि आप शेयर को नहीं खरीदना चाहते तो या नहीं बेचना चाहते तो हमे आईटीएम ऑप्शन से बचना चाहिए, तो एक्सपायरी डे को आने से पहले अपने ITM पोसिशन्स को क्लोज कर देना चाहिए।

क्योंकि अगर हम अंडरलाइंग एसेट की डिलीवरी लेते है तो उस पर टैक्स और अन्य चार्जेज बहुत ज्यादा लगते है इसलिए हमे अपनी पोसिशन्स को एक्सपायरी टाइम से पहले ही क्लोज कर देना चाहिए।

हेजिंग के साथ रिस्क मैनेजमेंट:

हेजिंग एक प्रभावी रिस्क मैनेजमेंट टूल्स है, खासकर जब मार्किट में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला दिन हो। अपनी मौजूदा पोसिशन्स को संरक्षित करने और प्रत्याशित नुकसान को सीमित करने के लिए हेजिंग के साथ रिस्क मैनेजमेंट करें।

थीटा को ट्रैक करें:

प्रीमियम का गलना, जिसे थीटा भी कहते हैं, ऑप्शन ट्रेडर्स के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है। जब ऑप्शन एक्सपायरी डेट के करीब पहुंचते हैं, तो उनका प्रीमियम तेजी के साथ घटता है। यदि आप एक्सपायरी के करीब ऑप्शन ट्रेड कर रहे हैं, तो अपनी पोसिशन्स पर समय के घटाव के प्रभाव को ध्यान में रखें।

एंट्री या एग्जिट:

एक्सपायरी डे पर अपनी पोसिशन्स को रखने या एग्जिट करने का फैसला करना चुनौतीपूर्ण होता है। आपके ऑप्शन में आप को लगता है की प्रॉफिट के चांस कम है तो आपने ऑप्शन को एक्सपायरी से पहले ही एग्जिट कर दें। दूसरी ओर, अगर आपके ऑप्शन लाभदायक स्थिति में हैं, तो आप उन्हें दिन के अंत तक रख सकते हैं।

अगली एक्सपायरी में ट्रेड करना:

एक्सपायरी डे पर करंट एक्सपायरी में ट्रेड न कर के हमे अगली एक्सपायरी (next expiry) के ऑप्शन पर ट्रेड करना चाहिए, क्योंकि एक्सपायरी डे वाले दिन और उस से एक दिन पहले थीटा की वैल्यू बहुत हाई होती है प्रीमियम बहुत ही तेजी के साथ गलती हैं तो उन दो दिने के लिए या खासकर एक्सपायरी के दिन हमे करंट एक्सपायरी में काम नहीं कर के नेक्स्ट एक्सपायरी में काम करना चाहिए।

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निष्कर्ष:

एक्सपायरी डे पर ऑप्शन ट्रेड में सफलता पाने के लिए एक अच्छी निर्धारित रणनीति और एक अनुशासित दृष्टिकोण आवश्यक होते हैं।

पहले से योजना बनाने, लिक्विड विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करने, हेजिंग के साथ जोखिम प्रबंधन, और समय के घटाव थीटा का ध्यान रखने और नेक्स्ट एक्सपायरी में ट्रेड कर के आप एक्सपायरी के दिन नुकसान होने से बच सकते हैं और अच्छा खासा प्रॉफिट भी कमा सकतें हैं।

हमेशा ध्यान रखें कि चंचलता लाभ और जोखिम दोनों को लाती है, इसलिए स्थिरचित्त रहें, और अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटजीस का अच्छे से प्रयोग करें। एक्सपायरी डे पर किसी नई स्ट्रेटजीस का ट्रायल न करे। प्रॉपर रिस्क मैनेजमेंट का पालन करते हुए और स्टॉप लोस्स के साथ ही ट्रेड करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: (FAQs)

Q. ऑप्शन ट्रेडिंग में एक्सपायरी डेट क्या है?

Ans. आमतौर पर ऑप्शन एक्सपायरी डेट एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की अंतिम तिथि होती है, जिस पर ऑप्शन होल्डर्स कुछ शर्तों के अनुसार अपने अधिकार का उपयोग कर सकते हैं। एक्सपायरी डे के बाद ऑप्शन ख़तम हो जाता है उसकी कोई वैल्यू नहीं बचती है। ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट प्रत्येक महीने के अंतिम गुरुवार को एक्सपायर होता है।

Q. अगर मैं एक्सपायरी पर ऑप्शन को स्क्वायर ऑफ करना भूल गया तो क्या होगा?

Ans. यदि किसी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की पोजीशन को एक्सपायरी डेट से पहले स्क्वायर ऑफ नहीं किया तो अगर आप का ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट इन दी मनी (ITM) कॉन्ट्रैक्ट बन जाता है तो ट्रेडर को उस अंडरलाइंग एसेट की डिलीवरी लेने पड़ेगी जिसमे अंडरलाइंग एसेट की की टोटल वैल्यू के हिसाब से टैक्स और अन्य चार्जेज देने पड़ेंगे।

Q. ऑप्शन ट्रेडिंग में शुरुआत कैसे करें?

Ans. ऑप्शन ट्रेडिंग की शुरुआत करने के लिए आपको शेयर मार्किट में किसी ब्रोकर के पास अपना डीमैट खाता खोलना पड़ेगा। उसके बाद उस डीमैट अकाउंट में फ्यूचर एंड ऑप्शन यानी डेरिवेटिव सेगमेंट को एक्टिवेट करना होगा। इसके बाद आप किसी भी स्टॉक या इंडेक्स में कॉल और पुट ऑप्शन को ट्रेड कर सकते हैं।

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